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दो साल बाद भी ‘अटैचमेंट खत्म’ आदेश बेअसर! अब लोक शिक्षण संचालनालय ने फिर बजाया सख्ती का बिगुल

दो साल बाद भी ‘अटैचमेंट खत्म’ आदेश बेअसर! अब लोक शिक्षण संचालनालय ने फिर बजाया सख्ती का बिगुल

रायपुर/छत्तीसगढ़ में अटैचमेंट समाप्ति को लेकर एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक निर्देश जारी हुआ है। लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने 24 फरवरी 2026 को स्पष्ट आदेश जारी कर कहा है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों को तत्काल उनकी मूल पदस्थापना पर कार्यमुक्त कर भेजा जाए।

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आदेश में क्या कहा गया ?

जारी पत्र क्रमांक क./स्था.4/2026/17, नवा रायपुर से जारी इस आदेश में सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि, जो शिक्षक एवं कर्मचारी अपनी मूल सेवाएं छोड़कर अन्य कार्यालयों/संस्थाओं में गैर-शैक्षणिक कार्यों में संलग्न हैं,

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उन्हें तत्काल प्रभाव से उनकी मूल संस्था में उपस्थित कराया जाए,
और की गई कार्रवाई से संचालनालय को अवगत कराया जाए। यह निर्देश पूर्व में 28.02.2024 को जारी शासन आदेश के संदर्भ में फिर से दोहराया गया है।
बड़ा सवाल: दो साल तक क्यों नहीं हुआ पालन?
ध्यान देने वाली बात यह है कि अटैचमेंट समाप्ति का आदेश लगभग दो साल पहले जारी किया गया था। इसके बावजूद आज भी कई शिक्षक और लिपिक वर्ग के कर्मचारी कलेक्टर कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालयों में जमे हुए हैं।
क्या पूर्व आदेशों को नजरअंदाज किया गया?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर ढिलाई बरती? या फिर कुछ कर्मचारियों को विशेष संरक्षण मिला हुआ था?

शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर

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ग्रामीण और दूरस्थ स्कूलों में पहले से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में यदि शिक्षक गैर-शैक्षणिक कार्यों में अटैच रहेंगे तो विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। शासन के शिक्षा सुधार के दावे तभी सार्थक होंगे जब शिक्षक कक्षाओं में नजर आएंगे, न कि दफ्तरों में।

अब होगी सख्त कार्रवाई?

नए आदेश में “तत्काल” शब्द का प्रयोग यह संकेत देता है कि इस बार प्रशासन सख्त रुख अपनाने के मूड में है। अब देखना होगा कि जिला स्तर पर अधिकारी कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और कितने कर्मचारियों को वास्तविक रूप से मूल संस्था में वापस भेजा जाता है।
यदि इस बार भी आदेश फाइलों में दब गया, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ गंभीर अन्याय माना जाएगा। अब निगाहें अमल पर हैं—क्या ‘अटैचमेंट का खेल’ खत्म होगा या फिर आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा?

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